अंडाशय में गाँठ क्यों बनती है ? ( Ovarian Cyst )
सिस्ट एक बंद थैली जैसी संरचना होती है। यह आसपास के टिश्यू से एक झिल्ली द्वारा विभाजित होता है। यह एक ब्लिस्टर (छाला य़ा फफोला) के समान तरल पदार्थ की एक असामान्य संरचना होती है। इसमें तरल, गैसीय या अर्ध-ठोस पदार्थ होते हैं। सिस्ट के बाहरी या कैप्सुलर हिस्से को सिस्ट वॉल कहते हैं। यह फोड़े से अलग है क्योंकि इसमें मवाद नहीं भरा होता है।
अंडाशय के अधिकांश सिस्ट आकर में छोटे और हानिरहित होते हैं। वे प्रजनन वर्षों के दौरान सबसे अधिक बार होते हैं, लेकिन वे किसी भी उम्र में हो सकते हैं। ओवेरियन सिस्ट के कोई संकेत या लक्षण नहीं होते हैं, लेकिन अंडाशय में गांठ कभी-कभी दर्द और रक्तस्राव का कारण बन सकते हैं। यदि सिस्ट का व्यास 5 सेंटीमीटर से अधिक है, तो भी इसको आयुर्वेदिक एवं पचंकर्मा चिकित्सा द्वारा जड़ से खत्म कर दिया जाता है।
अंडाशय में गाँठ क्यों बनती है ? - (Ovarian Cyst In Hindi)
आजकल जिस तरह का जीवन लोग जी रहे हैं उसमे हज़ार तरह की बिमारियों का होना आम बात हो गयी है लेकिन Ovarian Cyst उनमे से एक सामान्य बीमारी है जो महिलाओं में पायी जाती है। यह महिलाओं की ओवरी से जुड़ी बीमारी है जिसके कारण कई बार उन्हें प्राकृतिक रूप से कन्सीव करने में काफी परेशानी होती है। कुछ महिलाओं में इसके कोई लक्षण नहीं दिखाई देते हैं इसलिए बीमारी को पहचानना मुश्किल हो जाता है और इसका पता चलने में बहुत समय लग जाता है। लेकिन कुछ लोगों के मन में एक भ्रम भी होता है कि अगर यह बीमारी लम्बे समय तक बनी रही तो कैंसर का खतरा हो सकता है लेकिन यह बात सच नहीं है। इसलिए आपको घबराने की जरुरत नहीं है बल्कि शांत चित्त से पहले लक्षणों पर ध्यान दे फिर किसी डॉक्टर से कंसल्ट करें क्यूंकि अंडाशय की गाँठ का उपचार संभव है।
अंडाशय के सिस्ट प्रमुख रुप से दो प्रकार के होते है - (ovary me cyst ke prakar in hindi)
फंक्शनल ओवेरियन सिस्ट – सबसे आम प्रकार। ये हानिरहित सिस्ट महिला के सामान्य मासिक धर्म चक्र का हिस्सा होते हैं और अल्पकालिक अर्थात बहुत कम समय के लिए होते हैं।
पैथोलॉजिकल सिस्ट – ये वे सिस्ट हैं जो अंडाशय में बढ़ते हैं; वे हानिरहित या कैंसरयुक्त (घातक) हो सकते हैं।
फंक्शनल ओवेरियन सिस्ट भी दो प्रकार के होते है - (functional cyst kitne prakar ke hote hain in Hindi)
फॉलिक्युलर सिस्ट (Follicular Cyst): फॉलिक्युलर सिस्ट अंडाशय की गाँठ का सबसे सामान्य प्रकार है। अंडा जब अंडाशय से गर्भ में चला जाता है और शुक्राणु द्वारा निषेचित (fertilize) किया जाता है। अंडा कूप (follicle) में बनता है, जिसमें बढ़ते अंडे की रक्षा के लिए द्रव होता है। जब अंडा निकलता है, तो कूप (follicle) फट जाता है। कुछ मामलों में, कूप (follicle) या तो अपना तरल पदार्थ नहीं छोड़ता है और अंडे को छोड़ने के बाद सिकुड़ जाता है, या यह अंडा नहीं छोड़ता है। कूप (follicle) द्रव के साथ सूज जाता है, एक कूपिक डिम्बग्रंथि (follicular ovarian) सिस्ट बन जाता है। एक सिस्ट आमतौर पर किसी एक समय में होती है, और यह सामान्य रूप से कुछ ही हफ्तों में समाप्त हो जाती है।
ल्यूटियल ओवेरियन सिस्ट (Corpus Luteum Cyst): इस प्रकार के सिस्ट असामान्य होते है। अंडा जारी होने के बाद, यह ऊतक (टिश्यू) को पीछे छोड़ देता है, जिसे कॉर्पस ल्यूटियम (corpus luteum) के रूप में जाना जाता है। जब कॉर्पस ल्यूटियम रक्त से भर जाता है तो ल्यूटियल सिस्ट विकसित हो सकते हैं। इस प्रकार का सिस्ट आमतौर पर कुछ महीनों में दूर हो जाता है। हालांकि, यह कभी-कभी विभाजित हो सकता है, या टूट सकता है, जिससे अचानक दर्द और आंतरिक रक्तस्राव (internal bleeding) हो सकता है।
पैथोलॉजिकल सिस्ट
पैथोलॉजिकल सिस्ट दो प्रकार के होते हैं - (pathological cyst kitne prakar ke hote hain in Hindi)
डर्मोइड सिस्ट (सिस्टिक टेराटोमास) – एक डर्मोइड सिस्ट आमतौर पर सामान्य होता है। यह अंडे बनाने वाली कोशिकाओं से बनते हैं। इस तरह के सिस्ट को पंचकर्म चिकित्सा द्वारा जड़ से समाप्त कर दिया जाता है। 30 वर्ष से कम उम्र की महिलाओं के लिए डर्मोइड सिस्ट सबसे आम प्रकार का पैथोलॉजिकल सिस्ट है।
सिस्टेडेनोमा (सिस्टिक एडेनोमा) – सिस्टिक एडेनोमा ओवेरियन के सिस्ट हैं जो अंडाशय के बाहरी हिस्से को कवर करने वाली कोशिकाओं से विकसित होते हैं। कुछ एक गाढ़े, बलगम जैसे पदार्थ से भरे होते हैं, जबकि अन्य में पानी जैसा तरल होता है। अंडाशय के अंदर बढ़ने के बजाय, सिस्टेडेनोमा आमतौर पर एक डंठल द्वारा अंडाशय से जुड़े होते हैं। अंडाशय के बाहर मौजूद होने से, वे काफी बड़े हो सकते हैं। वे शायद ही कभी कैंसरग्रस्त होते हैं, लेकिन उन्हें पंचकर्म चिकित्सा द्वारा हटाने की आवश्यकता होती है। 40 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं में सिस्टेडेनोमा अधिक आम है।
Ovarian Cyst के लक्षण : अंडाशय में गाँठ होने के लक्षण सभी महिलाओं में एक जैसे नहीं होते हैं यह हर किसी में अलग अलग हो सकता है। सबमे इसके लक्षण दिखाई भी नहीं देते हैं इसलिए इसकी पहचान और भी मुश्किल हो जाती है लेकिन कुछ महिलाओं में दिखाई देने वाले लक्षण इस प्रकार हैं -
बार-बार पेट में दर्द या तनाव का एहसास।
मासिक धर्म में अनियमितता।
पेट में सूजन।
पेट के निचले हिस्से में दबाव या भारीपन महसूस होना।
पेट में गैस या आंतों में चुभन।
स्तनों में दर्द या सूजन।
मूड स्विंग्स या चिड़चिड़ापन।
वजन में बदलाव।
कम भूख लगना।
अन्य संकेत जैसे उल्टी, तापमान में वृद्धि, या पेशाब में बदलाव।
Ovarian Cyst के कारण : अंडाशय में गाँठ बनने का कारण उसके प्रकारों पर निर्भर करता है। अर्थात यह समस्या आपको क्यों हुयी है उसका पता तभी लगाया जा सकता है जब यह पता हो की सिस्ट किस प्रकार का है। कुछ ऐसे खास कारण हैं जो मुख्यतः पाए जाते है -
हार्मोनल असंतुलन : जब महिलाओं के शरीर में पुरुष हार्मोन्स ( एण्ड्रोजन ) की मात्रा बढ़ जाती है तो ओवेरियन सिस्ट की समस्या दिखाई देती है।
गर्भनिरोधक दवाओं के कारण: जो महिलाएं प्रेगनेंसी से बचाव के लिए गर्भनिरोधक दवाइयों का इस्तेमाल करती हैं उनके ओवरी में सिस्ट बनने की सम्भावना बनी रहती है।
गंभीर बीमारी : कई बार ओवरी में गाँठ बनने का कारण कोई गंभीर बीमारी भी हो सकती है। जैसे कैंसर, जो किसी रूप में आपके अंडाशय को प्रभावित करता हो।
Ovarian Cyst का परीक्षण : चूँकि Ovarian Cyst के लक्षण सामान्य तौर पर दिखाई नहीं देते हैं इसलिए इसके उपचार के लिए डॉक्टर से कंसल्ट करने का सही सामय भी समझ पाना मुश्किल है। इसलिए ऊपर बताये गए कुछ विशिष्ट लक्षणों पर ध्यान देकर आप इस बीमारी का पता लगा सकते हैं और फिर डॉक्टर के परामर्श से आगे का इलाज करवा सकते हैं। डॉक्टर कुछ कारकों जैसे पेशेंट की उम्र, चिकित्सा का इतिहास, शारीरिक क्षमता, सिस्ट के प्रकार आदि पर ध्यान देते हुए उपचार की अलग अलग विधि अपना सकते हैं। लेकिन उससे पहले परीक्षण के लिए आपको डॉक्टर द्वारा कुछ सलाह दी जा सकती है -
पेल्विक परिक्षण : यह एक प्रकार का शारीरिक जांच है जो डॉक्टर के द्वारा महिला की योनि में ऊँगली दाल कर उसके प्रजनन अंगों और सिस्ट की सही फंक्शनिंग का पता लगाने के लिए किया जाता है।
इमेजिंग परिक्षण : यह एक प्रकार का अल्ट्रासाउंड है जो ध्वनि तरंगों के माध्यम से महिला के प्रजनन अंगों और गर्भाशय की स्पष्ट इमेज प्रस्तुत करता है जिससे सिस्ट का पता लगाया जा सकता है।
लैप्रोस्कोपी तथा ब्लड टेस्ट के माध्यम से भी सिस्ट का पता लगाया जा सकता है।
अंडाशय में गाँठ का उपचार (ovarian cyst treatment): उपचार के कई तरीके हो सकते है लेकिन सामान्यतौर पर कोई भी डॉक्टर पहले दवाई खाने का सुझाव ही देता है फिर भी यदि कोई सुधार नहीं होता है तो परिक्षण रिपोर्ट के अनुसार आगे का इलाज किया जाता है।
दवाई : डॉक्टर आपकी स्थिति को देखते हुए आपको दवाई प्रेस्क्राइब कर सकते हैं जिससे अंडाशय में होने वाले सिस्ट का अकार बढ़ने से रोका जा सकता है और हार्मोनल संतुलन भी बनाया जा सकता है।
सर्जरी : जब दवाई से कुछ खास असर नहीं होता है तो डॉक्टर आपको सर्जरी करवाने की सलाह भी दे सकते हैं जिसके माध्यम से सिस्ट को पूर्णतः हटाया जा सकता है या उनका आकार भी बदलकर छोटा किया जा सकता है।
जीवनशैली में परिवर्तन : कई बार केवल आपकी जीवनशैली में थोड़े बहुत फेर बदल के बाद इसको ठीक किया जा सकता है। ऐसे में डॉक्टर नियमित रूप से व्यायाम करना, तनाव कम लेना, आहार में पौष्टिक चीजों को शामिल करना जैसे सुझाव दे सकता है जिससे आपकी ओवेरियन सिस्ट की समस्या को ख़त्म किया जा सके।
अंडाशय की गांठ का आयुर्वेदिक इलाज - (ovarian cyst ka ayurvedic ilaj)
अंडाशय में यदि सिस्ट हो जाती है तो आयुर्वेद में उसका सफल इलाज उपलब्ध है। आयुर्वेदिक इलाज के द्वारा रसौली या सिस्ट को हमेशा के लिए जड़ से खत्म कर दिया जाता है। आयुर्वेद की पंचकर्म चिकित्सा (पत्र पिंड चिकित्सा) के द्वारा महिला शरीर का शुद्धिकरण कर दिया जाता है। आयुर्वेदिक औषधियों के द्वारा अंडाशय की सूजन एवं संक्रमण को खत्म किया जाता है। सिस्ट को कम करने के लिए आयुर्वेदिक चिकित्सा के अनुसार प्रभाल पिष्टि, शिला सिंदूर, मोती और ग्लोय जैसी औषधि का प्रयोग भी किया जाता है।
एक जो सबसे जरुरी बात है वह यह की आपको ऐसी किसी बीमारी के लिए अब घबराने की आवश्यकता नहीं है। चिकित्सा व्यवस्था ने इतनी तरक्की कर ली है की ऐसी किसी भी समस्या का इलाज संभव है और आप निःसंकोच माँ भी बन सकती हैं इसलिए अब ओवेरियन सिस्ट जैसी बीमारी आपके माँ बनने के मार्ग में रुकावट नहीं बन सकती है।

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